सीजी राइट टाइम्स न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट
हैंडपंप मरम्मत के नाम पर दो बार में 70 हजार का आहरण, फिर भी महीनों से बंद है पेयजलापूर्ति
लोरमी : ग्रामीण विकास और भ्रष्टाचार का कैसा 'गठबंधन' होता है, इसकी बानगी देखनी हो तो ग्राम पंचायत डिंडोरी (चि) चले आइए। यह वह इलाका है जिसकी पहचान केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के गृह ग्राम और उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विधानसभा क्षेत्र के रूप में होती है। लेकिन यहाँ की हकीकत विकास के दावों के ठीक उलट है। सरकारी फाइलों में हैंडपंप सुधर चुका है और राशि का आहरण भी हो गया है, पर हकीकत में मोहल्ले के आधा दर्जन परिवार एक-एक बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
*सरपंच पति की 'दबंगई': न खुद सुधारा, न ग्रामीणों को दी अनुमति*
ग्रामीण खेमेश्वर पुरी गोस्वामी द्वारा कलेक्टर को दी गई लिखित शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, 5 फरवरी 2026 को सरपंच पति ने मरम्मत के नाम पर सबमर्सिबल पंप निकलवाया था। आरोप है कि सचिव के साथ मिलीभगत कर पंप मरम्मत के नाम पर करीब 70,000 रुपये की राशि जनवरी में लगभग 40 हजार व 1 मार्च को 30 हजार रुपए सरकारी खजाने से निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार में नई मोटर 7 से 8 हजार रुपये में उपलब्ध है, तो फिर लगभग 70 हजार रुपये की राशि कहाँ खपा दी गई? खेमेश्वर पुरी ने जब स्वयं के खर्च पर मोटर लगवाने व मोटर की मरम्मत कराने की बात कही, तो उन्हें दबंगई दिखाते हुए गाली गलौज व जान से मारने की धमकी देकर रोक दिया गया।
*कलेक्टर का 'आदेश' और अफसरों की 'जांच' में फंसा समाधान*
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने तत्काल जनपद पंचायत सीईओ को निराकरण के निर्देश दिए थे। सीईओ ने 'जांच समिति' गठित करने का झुनझुना तो थमा दिया, लेकिन आज तक न तो जांच हुई और न ही ग्रामीणों की प्यास बुझी। वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण हैंडपंप पूरी तरह ठप पड़ा है और रसूखदारों के दबाव में प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए नजर आ रहे हैं।
*सत्ता के 'गढ़' में सिस्टम फेल*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश और केंद्र के ताकतवर मंत्रियों के अपने क्षेत्र व गृह ग्राम में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है,तो प्रदेश के सुदूर गांवों की क्या स्थिति होगी? क्या जिला प्रशासन उन जनप्रतिनिधियों और सचिवों पर कार्रवाई की हिम्मत जुटा पाएगा जो सरकारी राशि का बंदरबांट कर जनता को प्यासा मार रहे हैं?
"हमारा तो बस इतना ही गुनाह है कि हमने पानी मांगा। हमें निर्विरोध चुने जाने की धौंस दी जाती है और डराया-धमकाया जाता है। आखिर हम जाएं तो कहां जाएं?" — खेमेश्वर पुरी गोस्वामी (पीड़ित ग्रामीण)


