सीजी राइट टाइम्स न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट
मुंगेली (छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में सड़क निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। खनिज विभाग से आवश्यक अनुमति लिए बिना ही गांवों के तालाबों को खोदकर मिट्टी और मुरूम का उपयोग सड़क निर्माण में खुलेआम किया जा रहा है। ताजा मामला मुंगेली जिले के पथरिया जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरा के आश्रित ग्राम मंदवानी से सामने आया है, जहां गांव के एक निस्तारि तालाब को भारी मशीनों से खोदकर मिट्टी और मुरूम निकाला जा रहा है।
स्थानीय लोगों की शिकायत पर जब मौके की पड़ताल की गई तो पाया गया कि तालाब में जेसीबी मशीन से खुदाई कर ट्रकों के माध्यम से मिट्टी और मुरूम का परिवहन किया जा रहा है। यह सामग्री बैतलपुर–मदकू मार्ग के सड़क निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही है, जिसका निर्माण कार्य अनिल बिल्डकॉन द्वारा किया जा रहा है। यह कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) से संबंधित बताया जा रहा है।
सरपंच का दावा, लेकिन हकीकत कुछ और
मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि तालाब के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए जिला पंचायत को प्रस्ताव भेजा गया है और उसी के तहत यह कार्य चल रहा है। हालांकि जब मौके पर मौजूद जेसीबी चालक और ट्रक चालकों से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि सभी वाहन रिंकू गुप्ता के हैं और उनके निर्देश पर ही खुदाई व परिवहन किया जा रहा है।
रिंकू गुप्ता से बात करने पर उन्होंने एक शासकीय आदेश की प्रति दिखाई, जिसमें यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि तालाब के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के दौरान प्राप्त मिट्टी या मुरूम के परिवहन की अनुमति दी गई है, लेकिन खुदाई की अनुमति कहीं भी नहीं दी गई है। इसके बावजूद तालाब को खोदकर बड़े पैमाने पर मिट्टी-मुरूम निकाली जा रही है।
मौके पर ये वाहन मिले
मौके पर निम्न पंजीयन नंबर के ट्रक अवैध उत्खनन और परिवहन करते हुए पाए गए—CG 10 R 0431 साथ में और तीन ट्रैक था
इसके अलावा एक चेन माउंटेड जेसीबी मशीन भी लगातार खुदाई में लगी हुई थी।
प्रशासन को खुली चुनौती?
बिना खनिज विभाग की विधिवत अनुमति के तालाब से मिट्टी-मुरूम निकालना पूरी तरह अवैध है। ठेकेदार, पंचायत प्रतिनिधि और ट्रांसपोर्टरों की आपसी मिलीभगत से यह अवैध उत्खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि शासन के नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियां भी उड़ा रहा है। यह पूरा मामला प्रशासन को मुंह चिढ़ाने जैसा प्रतीत हो रहा है।
बड़े सवाल खड़े होते हैं—
1. जब आदेश में केवल परिवहन की अनुमति है, तो खुदाई किसके आदेश से की जा रही है?
2. क्या तालाब के गहरीकरण के नाम पर सड़क निर्माण के लिए मिट्टी-मुरूम का अवैध खखन किया जा सकता है?
3. खनिज विभाग और राजस्व अमला अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
4. क्या PWD के ठेकेदारों को अवैध उत्खनन की खुली छूट मिली हुई है?
5. तालाब जैसे सार्वजनिक जलस्रोत को नुकसान पहुंचाने की जवाबदेही किसकी होगी?
अब देखने वाली बात यह होगी कि समाचार प्रकाशन के बाद इस मामले में जिला प्रशासन और खनिज विभाग आंखें मूंदे रहता है, या फिर अवैध उत्खनन में शामिल ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।

