बेमेतरा से उमाशंकर दिवाकर की खास रिपोर्ट
*3 01 कट्टा धान खरीदी बिक्री का मामला*
बेमेतरा - छत्तीसगढ़ शासन की धान खरीदी का शुभारंभ होते ही बड़े किसानों के काले कारनामे उजागर होने लगे कैसे हुआ कब हुआ तथा मामले की पूरी जानकारी को समझने का प्रयास करते हैं। टोकन तो काटा किंतु धान समिति में नहीं पहुंचे और हो गई खरीदी...खाद्य मंत्री के निज विधानसभा नवागढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सेवा सहकारी समिति मर्यादित पं.क्रं. 397 में सनत धर दीवान पिता विष्णु धर दीवान नामक किसान के द्वारा 301 कट्टी धान समिति के समर्थन मुल्य में बेचने लाने का टोकन जारी हुआ था। उक्त टोकन पर सिर्फ 100 कट्टी धान को ही समिति में लाया गया ऐसा भ्रम फैलाया गया कि उसके और आने वाले धान गाड़ी जो है खराब हो गई है जिनके वजह से बाकी का धान नहीं आ पाया ऐसे सोच करके समिति के जो प्रबंधक है वह लापरवाही बरतते हुए छत्तीसगढ़ धान खरीदी के नियम को ताक में रखकर उक्त किसान के धान को समिति में तोल करके छलनी लगा देने का झुठा बात मिडिया को बताया गया । उक्त धान कहां पर रखा है और यह भी झूठ बोल मीडिया के सामने की धान यहा रखा हुआ है कहके अन्य स्थान में रखे धान को दिखाया और कहा की यही वह 100 क्विंटल धान है जबकी समिति के अध्यक्ष और कर्मचारी दूसरे स्थान पर रखें धान को बतलाया आप सोचने वाली बात यह है कि धान दो अलग-अलग जगह पर कैसे रखा गया । या तो समिति प्रबंधक झूठ बोल रहा है या तो उनके कर्मचारी झूठ बोल रहे हैं या फिर समिति के अध्यक्ष झूठ बोल रहे हैं। अब किसकी बात को हम सही माने।जबकी उक्त धान को फड में शामिल कर दिया गया है। यदि इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाए तो बहुत सारे और मामले में खुलासा हो सकता है। वही बारदाना टोकन वाली जो मुख्य रजिस्टर है जिसमें काट छांट करके किसान के नाम और उनके द्वारा लाए गए धान व बारदाने में काट छांट करके उक्त मामले को दबाने का भी प्रयास किया गया। जानकारी की भनक समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार साहू को लगते ही समिति अध्यक्ष ने विभागीय अधिकारी को सूचना दी और बताया की मनमानी करते हुए समिति के सहायक प्रबंधक उमेश कुमार साहू के द्वारा बगैर किसान के धान की बिक्री करने का मन बना रखा है। वही 100 क्विंटल धान की खरीदी करके छल्ली भी लगा दिया गया जिनका गुलाबी कार्ड कट करके दे दिया गया विभागीय अधिकारियों ने इस बात को भी पुष्टि की धान की खरीदी किया गया किंतु उसकी ऑनलाइन नहीं चढ़ाया गया। वही गुलाबी टोकन कट करके संधारित करके गुलाबी टोकन किसान को जारी कर दिया गया। समिति के सहायक प्रबंधक व समिति के मौजूद कर्मचारी जिसमें लिपिक, कंप्यूटर,ऑपरेटर सभी का लिखित स्टेटमेंट लेकर के गए हुए हैं जिसमें उनके द्वारा उल्लेखित बातों का स्पष्ट किया कि उमेश साहू सहायक प्रभारी समिति प्रबंधक मऊ के द्वारा उनके कहे मुताबिक कार्य करने की बात स्पष्ट हुई है। इतनी बड़ी चूक आखिर समिति प्रबंधक क्यों कि कहीं ना कहीं कमीशन का खेल रहा कमीशन लेने के उद्देश्य से किसान के साथ उनकी समझौता रही होगी और वह बड़े किसान हैं क्षेत्र के जनपद सदस्य हैं कहीं ना कहीं राजनीतिक दबाव हावी होने की वजह से वह उक्त किसान को टोकन तो काटा और 100 क्विंटल धान की खरीदी भी की गई किंतु ऑनलाइन बिक्री को शामिल नहीं करना फर्जी धान खरीदी को स्पष्ट जाहिर कर रहा है।
*सौ कट्टे धान का आनलाईन खरीदी बिक्री क्यों नहीं चढ़ाई जांच का विषय*
सेवा सहकारी समिति के प्रभारी समिति प्रबंधक द्वारा बड़े किसानों को सुविधा देने के एवज में कहीं कमिशन तो नहीं लेते यह सब जांच का विषयहै। समिति की कर्मचारियों की जो लापरवाही है वह इस कदर है कि प्रदेश सरकार की छवि को बदनाम और तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक किसान के सारे पर काम करते सहकारी समिति के जो प्रभारी प्रबंधक है वह लपेटे में आ गए या पूरी वाक्य जो है नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत के आने वाले सेवा सहकारी समिति मऊ का मामला है जहां पर सूचना की जानकारी मिलते ही विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को बुलाया गया मौके में जांच हुई लिखित मौखिक बयान ली गई ।
*काले कारनामे को दबाने पत्रकारों को भी लाखों का प्रलोभन*
सेवा सहकारी समिति मर्यादित मऊ पंजीयन क्रमांक 397 के प्रभारी समिति प्रबंधक उमेश साहू के द्वारा मामले की खबर प्रसारित न करने व किसी भी तरीके से सोशल मीडिया में न डालने के लिए प्रबंधन के द्वारा मीडिया कर्मियों को लाखों रुपए का ऑफर दिया । ऑनलाइन स्कैनर के माध्यम से पैसा तुरंत देने तैयार हो गई। पत्रकार ने कहा कि जिस तरीके से काले कारनामे आपके द्वारा किया गया उसमें हमें खबर लगाना है क्योंकि विभागीय अधिकारी जांच कर लिए हैं हमारी उपस्थिति में कोई भी मामला छुप नहीं सकता क्योंकि मामले में बचने के बाद आरोप प्रत्यारोप में पत्रकारों को फंसा दिया जाता है । इस बात के वज़ह तथा स्वाभिमान को ध्यान में रखते हुए पैसे लेने की आफर को पत्रकारों ने ठुकरा दी । किंतु बार-बार समिति प्रबंधक अपने आप को बचाने के लिए एड़ी चोटी एक करते हुए अपने कर्मचारी लिपिक के साथ पत्रकारों का हाथ पैर जोड़ते हुए मामले में राजी नामा कर खबर न लगाने की जिदो जहत करने लगी।
