तप्ती धूप 44 डिग्री गर्मी बरगद का वृक्ष बना मवेशियों के छांव का सहारा.... देखिए खास खबर - CG RIGHT TIMES

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Sunday, May 21, 2023

तप्ती धूप 44 डिग्री गर्मी बरगद का वृक्ष बना मवेशियों के छांव का सहारा.... देखिए खास खबर

सीजी राइट टाइम्स न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट 


तप्ती धूप 44 डिग्री गर्मी बरगद का वृक्ष बना मवेशियों के छांव का सहारा




मुंगेली - जिले में इन दिनों बढती धुप और गर्मी का तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के आस पास पहुंच गई है! जिसमें दोपहर का तापमान भी देखने लायक है। ऐसे में चारे और पानी के लिए घूम रहे पशुओं का इतनी तप्ती चिलचिलाती धूप में उनके लिए नुकसान दायक साबित होगा। इन बेजुबानों को गर्मियों के मौसम में गर्म हवा और बढ़ते तापमान से पशुओं को बीमार होने का खतरा और बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर दुधारू पशु और छोटे बच्चो पर पड़ सकता है। पशुओं में सांस कि दिक्कत भी पैदा हो जाती हैं और हापने लगते है। इसी बीच तेज धूप में दोपहर करीब 2 के बजे आसपास पथरिया से लगभग 8 मील दुर स्थित ग्राम पंचायत रोहरकला में तालाब के किनारे स्थित एक बरगद का पेंड की छाव में गायों का झुंड आराम करते नजर आया। जिसको देखकर शासकीय वीरांगना अवंतीबाई लोधी महाविद्यालय पथरिया के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार राजपूत ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में तापमान बढ़ती जा रही है और यहां की हरियाली में दिनों दिन कमी आ रही है, जिसकी वजह है धड़ल्ले से काटे जा रहे हैं। पक्की इमारतों की संख्या बढ़ रही है, पक्की सड़कों का विस्तार तेजी से हो रहा है और तापमान भी उसी  रफ्तार से बढ़ रहा है। भौतिक जीवन कि भागदौड़ में आज इंसान इतना लापरवाह हो गया हैं कि उसको अपने जीवन के साथ- साथ पशुओं का जीवन भी दिखाई नहीं दे रहा है। काफी हदतक तापमान की खतरे को  जीवन में हर एक इंसान को अधिक से अधिक पौधारोपण करके  बढ़ते तापमान को रोका जा सकता  है।लेकिन आज के समय में जरूरत इस बात की है हम एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका अदा करते हुए ना केवल खुद  ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाए बल्कि अपने आस पास के लोगो को भी वृक्षारोपण को लेकर जागरूक करे। साथ ही अक्सर देखा गया है कि विभिन्न तरह के अभियान आदि या फिर किसी के कहने में आकर हम पौधारोपण तो कर दे देते हैं, लेकिन कुछ दिनो बाद हमें याद भी नहीं रहता कि हमने कभी कोई पौधा भी लगाया था। पौधारोपण का मतलब केवल पौधा लगाने भर से ही पूरा नहीं हो जाता। पौधारोपण का मतलब है कि आप बच्चे की ही तरह पौधे को पूरे मन व संकल्प के साथ गोद लें। जिस तरह से हम अपने बच्चे के खाने पीने और तमाम छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल रखते हैं। उसी तरह पौधे को सींचने से लेकर उसको बड़ा करने तक की जिम्मेदारी भी हमें उठानी होगी तब जाकर असल रूप में पौधारोपण का उददेश्य पूरा होगा।आगे उन्होंने ये भी कहा कि  शासन प्रशासन को इसकी ध्यान रखना चाहिए की बिना अनुमति के या फिर अवैध रूप से पेड़ काटने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा जुर्माना के साथ या यहा तक की सजा का प्रावधान होना चाहिए। अन्यथा आने वाले दिनों में इसके जिम्मेदार हम खुद होंगे जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते!


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