भिलाई रिसाली दिल्ली पब्लिक स्कूल में वार्षिक एग्जीबिशन में हुए उपस्थित..गितेश्वरी बघेल.. देखिए खास खबर - CG RIGHT TIMES

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Saturday, August 6, 2022

भिलाई रिसाली दिल्ली पब्लिक स्कूल में वार्षिक एग्जीबिशन में हुए उपस्थित..गितेश्वरी बघेल.. देखिए खास खबर

 दिल्ली पब्लिक स्कूल रिसाली भिलाई के वार्षिक एग्जीबिशन में हुए उपस्थित :-  गीतेश्वरी  बघेल......... 

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दूर्ग - दिल्ली पब्लिक स्कूल रिसाली सेक्टर भिलाई आज दिन शनिवार को स्कूल प्रागण मे वार्षिक एग्जिबिशन रखा गया था जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ गित ेश्वरी बघेल व  राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत के प्रदेश आरटीआई प्रकोष्ठ कविदास बघेल उपस्थित रहे! तथा

स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत वशिष्ठ, स्कूल प्रबंधन के सभी मेंबर, टीचर्स, स्टाफ,  प्री सीनियर विन्ग्स  के टीचर प्रतिश कुमार शर्मा  तथा अन्य टीचर्स का भरपूर सहयोग रहा स्कूल के सभी बच्चे हर्ष उत्साह से भरे हुए दिखे


वही गीतेश्वरी  ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे बघेल ने कहा की एग्जीबिशन मे शामिल होकर  ऐसा लग रहा था मानो संपूर्ण भारत भ्रमण यात्रा पर निकली हूं।

राजस्थान ,गुजरात ,पश्चिम बंगाल, कोलकाता, पंजाब ,छत्तीसगढ़ ,उड़ीसा ,केरल, कर्नाटक, इत्यादि राज्यों के नृत्य मानो मन में उत्साह तथा उमंग भर रहे हो, छात्रों के द्वारा प्रस्तुत किया गया नृत्य- संगीत हमें भारत की अनेकता में एकता, भारत के अखंडता का बोध करा रहा है। बच्चों ने  भारतीय संस्कृति की विविधा कलाओं को बड़े ही प्रेम से अपने रंगोली में फिरोंते हुए हमारे सम्मुख प्रस्तुत किया जिससे मन सराबोर हो गया। 

       छात्र-छात्राओं ने हमारे भारत की संस्कृति को अपने मॉडल्स में प्रस्तुत किया था जिसमें सारनाथ का अशोक स्तंभ सभी के मन को मोह रहा था। दिल्ली का कुतुब मीनार, जंतर -मंतर मंदिर,हवा महल जयपुर,जल महल जयपुर, आई फिल टावर, इत्यादि प्रदर्शनी लगाकर हमें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विश्व विरासतो से रूबरू करवाया गया। अलग-अलग राज्यों ने बनाए जाने वाले प्रादेशिक व्यंजनों से स्टॉल को सजाया गया था जिस का लुफ्त सभी पाल को तथा बच्चों ने उठाया और अपनी संस्कृति से परिचित हुए 


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