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Tuesday, March 29, 2022

शराबप्रेमियों से सुपरवाइजर कंपनी के इशारे पर करते है अवैध उगाही,.... देखिए खास खबर

सीजी राइट टाइम्स न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट


शराब प्रेमियों से सुपरवाईज़र कंपनी के इशारे पर करते है अवैध उगाही, दिए गए बोतलों के mrp मूल्य से अधिक की वसूली, शराब की सभी बोतलों पर मिलाया जाता है पानी 


बस्तर - आपको बता दे शराब दुकानों में छत्तीसगढ़ सरकार का नियंत्रण है, छत्तीसगढ़ सरकार शराब के सभी बोतलों पर निर्धारित मूल्य दर तय कर दिया है ,प्रत्येक बोतलों में mrp लगाई गई है ..ताकि निर्धारित मूल्य पर बेची जाये ...बावजूद उसके पूरे बस्तर संभाग में ओवररेटिंग किया जा रहा है,


इस बात से अंदेशा लगाया जा सकता है कि दुकान के सुपरवाइजर आबकारी अधिकारी व प्लेसमेंट कंपनी की साठगांठ से लाखो की अवैध वसूली को अंजाम दिया जाता होगा? सभी नियमो को दरकिनार कर शराब की सभी बोतलों में एमआरपी से अधिक दाम लेकर लगातार शराबप्रेमियों की जेब काटे जा रहे है.साथ ही साथ अधिक मुनाफा के लिए शराब के सील पैक बोतलो को खोलकर पानी मिलाया जाता है,.आपको बता दे ऐसे बहुत से शराब दुकान शहर से लगा है और सभी आला अफसरों का इसी सड़क से आना -जाना है परंतु शराब दुकान संचालक  लगातार दबंगई के साथ बेख़ौफ़ होकर अपनी मनमानी किये जा रहा है,..सबसे बड़ा सवाल ये है,कि आखिर इन्हें संरक्षण कौन देता है ?? अब देखने वाली बात यह  होगा कि जब खबर प्रकाशित होने के बाद कोई करवाई नही होती है,इसकी शिकायत बहुत जल्द वीडियो फुटेज सीडी के साथ आबकारी आयुक्त को लिखित शिकायत किया जाएगा,अब देखा जाएगा कि  जिम्मेदार अधिकारी कुम्भ की नींद में सोये रहते है या लोगो की जेब पर जो प्रभाव पड़ रहा है उस पर अंकुश लगता है, अब हम आपको विस्तार से बताते चलते है कि सबसे ज्यादा बिकने वाले गोवा स्पेसल की निर्धारित मूल्य 120 रुपया है जिसे 130 से लेकर 140 तक पर प्रत्येक दुकानों पर बिकते हुए देखने को मिल जाएगा, इस बात से अन्तज़ा लगा सकते है कि अगर पूरे बस्तर संभाग में देशी विदेशी मंदिरा दुकान मिलाकर 38 दुकाने है सभी दुकानों में ओवररेटिंग का खेल खेला जा रहा है तो लाखों की पैसा किसके जेब मे जाता है ?इस बात की ताब्दीश करने हमारे टिम ने दुकानों का रिपोर्टिंग किया तो चौकाने वाली बात सामने आई दुकान के सुपरवाइजर ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा कि कंपनी वाले कहते है अगर ओवरेटिंग नही करते हो तो हटा दिया जाएगा हमे प्रेसर रहता है तो करना पड़ता है आबकारी प्रभारी लोग भी सेटिंग में है तभी चल रहा। लाजमी सी बात है कि इस पैसे का हिस्सा कंपनी से लेकर आबकारी के प्रभारियो व उच्च अधिकारियों तक पहुंचता होगा? तभी विगत 2 वर्षों से इस खेल को यहाँ पर खेला जा रहा है।


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