बिना अनुमति शासकीय तालाब से मिट्टी–मुरूम निकालने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश........
CG. Right Times news.........
पथरिया - जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत लमती से मचहा तक कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से हो रहे इस निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत लमती के आश्रित ग्राम मचहा में शासकीय स्कूल के समीप मौजूद निस्तारी शासकीय तालाब से कथित रूप से अवैध उत्खनन किए जाने की बात कही जा रही है। इस मामले के सामने आने के बाद कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में उपयोग की जा रही मिट्टी और मुरूम तालाब से बिना किसी वैधानिक अनुमति के निकाली जा रही है। निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार राकेश कुमार शर्मा, निवासी बिलासपुर, पर तालाब से अवैध रूप से सामग्री निकालने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में किसी भी प्रकार की शासकीय स्वीकृति या आदेश की जानकारी नहीं है।
*स्थानीय ग्रामीणों ने कहा*
ग्रामीणों ने बताया कि निस्तारी तालाब गांव की सामूहिक और सार्वजनिक संपत्ति है, जिसका उपयोग ग्रामीण निस्तार एवं जल संरक्षण के लिए किया जाता है। ऐसे में तालाब से अवैध उत्खनन न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे पर्यावरण संतुलन और जलस्रोतों के संरक्षण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पूर्व सरपंच अंगिरा सिंह राजपूत.......
मामले में पूर्व सरपंच से जानकारी लेने पर उन्होंने भी स्पष्ट किया कि तालाब में खनन के लिए किसी प्रकार की अनुमति या आदेश उनके संज्ञान में नहीं है।
वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि ने कहा.......
वहीं वर्तमान सरपंच के प्रतिनिधि ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से न तो जनपद पंचायत और न ही जिला पंचायत को तालाब में खनन के लिए कोई प्रस्ताव भेजा गया है और न ही शासन स्तर से इस प्रकार के किसी कार्य की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद यह सवाल और गहराता जा रहा है कि जब किसी भी स्तर पर अनुमति नहीं है, तो निस्तार शासकीय तालाब से मिट्टी और मुरूम का उपयोग सड़क निर्माण में किसके निर्देश पर किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह उत्खनन अवैध है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
ठेकेदार ने फोन रिसीव नहीं किया........
ठेकेदार का पक्ष जानने के लिए संबंधित व्यक्तियों से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। इससे मामले को लेकर स्थिति और भी संदिग्ध होती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कथित अवैध उत्खनन से एक ओर शासन को राजस्व हानि की आशंका है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक जलस्रोत को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले पर संज्ञान लेते हैं या नहीं, और निस्तारी शासकीय तालाब से हुए कथित अवैध उत्खनन को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।

