डॉ.बाबा साहेब अंबेडकर की विरासत को नरेंद्र मोदी ने पुनर्जीवित किया - शीलू साहू
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*विधानसभा लोरमी/-* संविधान के निर्माता, दलितों के मसीहा और मानवाधिकार आंदोलन के प्रकांड विद्वता बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का जयंती हर वर्ष की भाती इस वर्ष भी ग्राम मारूकापा लालपुर (थाना ) में 14 अप्रैल को मनाया गया। डॉ. अंबेडकर जी की जयंती पर 5 दिवसीय भव्य अंबेडकर महोत्सव का आयोजन किया गया था। जिसमे जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शीलू साहू जी सम्मिलित हुई। तत्पश्चात डॉ. अम्बेडकर जी की छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शीलू साहू ने बाबा साहेब को याद करते हुए उनके जनकल्याण के लिए किए गए अभूतपूर्व योगदान को याद किया। बाबा साहेब निचले तबके से तालुक रखते थे। बचपन से ही समाजिक भेदभाव का शिकार हुए। यही वजह थी कि समाज सुधारक बाबा भीमराव अंबेडकर ने जीवन भर कमजोर लोगों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। महिलाओं को सशक्त बनाया। बाबा साहब संविधान के निर्माता थे. 1891 में मध्य प्रदेश के महू में उनका जन्म हुआ था. बाबा साहब समतामूलक समाज के पक्षधर थे !
उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं के उत्थान के लिए काफी काम किए. यही नहीं, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को शुरू से ही सामाजिक तौर पर जातिगत भेदभाव झेलना पड़ता था. वह देश के पहले कानून मंत्री बने. डॉ भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कमजोर और पिछड़ा वर्ग को समान अधिकार दिलाने, जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध कर समाज में सुधार लाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। यही वजह है कि बाबा साहेब की जयंती को भारत में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने, समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध कर समाज में सुधार लाने का काम किया है। वही कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य सहित अन्य वक्ताओं ने बाबा साहेब द्वारा लिखे संविधान की भी चर्चा किया। साथ ही उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने की बात कही। इस मौके पर बड़ी संख्या में नारीशक्ति एवम् पुरुषशक्ति उपस्थित रहे।।

