सुआ नृत्य सामाजिक एकता को देता है बढ़ावा :- सुरेश कुमार राजपूत.....
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पथरिया - छत्तीसगढ़ में सुआ नृत्य के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांव हो या शहर हर तरफ दीपावली के अवसर पर छोटी बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक सुआ नृत्य करते दिखाई देती हैं।ग्राम पंचायत बेलखुरी में भी दीपावाली से पहले बच्चियों की टोली घर-घर सुआ नृत्य करते नजर आ रही हैं।जिसको लेकर ग्राम पंचायत बेलखुरी के युवा,सामाजिक कार्यकर्ता,शासकीय वीरांगना अवंतीबाई लोधी महाविद्यालय पथरिया के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुरेश कुमार राजपूत ने बताया कि सुआ नृत्य सामाजिक एकता को बढ़ावा देता हैं।
यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आदिवासी समुदाय की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है।इस नृत्य के माध्यम से महिलाएं अपनी फसल कटाई के बाद की खुशियों को साझा करती हैं।इस नृत्य में एक मिट्टी के तोते को धान की टोकरी में रखकर उसके चारों ओर घेरा बनाकर ताली बजाते हुए गीत गाती हैं।आसपास के ग्रामीण अंचल में इन दिनों सुआ नृत्य की धूम मची हुई हैं।वर्तमान में सुआ नृत्य आदिवासी परंपराओं से आगे बढ़कर अब सामान्य संस्कृति का हिस्सा बन गया हैं।युवा ने बताया कि खासतौर पर इसका आयोजन दीपावाली के समय होता हैं।

