संभागीय उड़नदस्ता व आबकारी संयुक्त टीम ने मारा छापा 10 पेटी अंग्रेजी शराब 30 लीटर की स्पिरिट लिक्विड बरामद....
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*स्कूल में मिला शराब का जखीरा – शिक्षा का मंदिर बना शराब का अड्डा*
मुंगेली । सरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बावली से अवैध शराब का बोरी में रखे जखीरा मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। अज्ञात आरोपी के खिलाफ कार्यवाही जारी है।। दिनांक 29/09/2025 को संभागीय उड़नदस्ता और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने जब आकस्मिक छापा मारा, तो वहां से 10 बोरी अंग्रेजी शराब और 30 लीटर की गैलन में स्पिरिट लिक्विड बरामद हुआ।
विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह का अवैध भंडारण होना सिर्फ शर्मनाक ही नहीं, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था पर काला धब्बा है। सवाल यह है कि आखिर इस नशे का जखीरा यहां तक पहुंचा कैसे? और इससे भी बड़ा सवाल यह है कि मध्यप्रदेश से अवैध शराब और स्पिरिट लाने के बावजूद आबकारी विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
शिक्षा का मंदिर या शराब का गोदाम?
विद्यालय वह स्थान है जहां बच्चों को संस्कार और शिक्षा दी जाती है, लेकिन बावली स्कूल में शराब और स्पिरिट मिलना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था खोखली हो चुकी है। बच्चे जिस जगह ज्ञान लेने आते हैं, वहां शराब की बोरी और स्पिरिट की गैलन रखी मिलीं। यह दृश्य न सिर्फ माता-पिता को, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देने वाला है।
जिला शिक्षा अधिकारी की सख्त प्रतिक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत आदेश जारी किया है। विकास खंड शिक्षा अधिकारी पथरिया को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे प्रकरण की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। वहीं, प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे
आबकारी विभाग की ने कहा- पथरिया आबकारी उपनिरीक्षक उम्मी रूमा ने बताया कि जांच प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है। विद्यालय की छुट्टी होने के कारण प्राचार्य का बयान दर्ज नहीं हो सका है। बयान लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन यहां सवाल यह भी है कि जब शराब का यह जखीरा मध्यप्रदेश से लाया गया तो आखिर इतनी बड़ी खेप बिना रोक-टोक के जिले में कैसे प्रवेश कर गई?
क्या पुलिस की चौकियों पर वाहनों की जांच सिर्फ खानापूर्ति है? क्या आबकारी विभाग ने अपनी आंखें मूंद रखी थीं? क्या यह तस्करी बिना अंदरूनी सांठगांठ के संभव थी? अगर सीमाओं पर चौकसी होती, तो यह शराब स्कूल तक नहीं पहुंच पाती। यह स्पष्ट करता है कि कहीं न कहीं तंत्र में गंभीर खामियां हैं या फिर मिलीभगत का खेल चल रहा है। इससे पहले भी इस तरह की खुलासा हो चुके है।
यह घटना केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलती है। अगर स्कूल तक शराब और स्पिरिट की खेप पहुंच सकती है, तो यह मान लेना चाहिए कि जिले में नशे का नेटवर्क गहराई तक फैला हुआ है।
आबकारी विभाग केवल छापेमारी के बाद प्रेस नोट जारी कर अपना दामन बचा सकता है, लेकिन जब तक सीमाओं पर सख्त निगरानी और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक शराब माफिया फलते-फूलते रहेंगे। पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आखिर इतनी बड़ी खेप की आवाजाही उनकी नजरों से कैसे बच गई?
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बावली में शराब का जखीरा मिलना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है।
अब जरूरी है कि— आरोपियों की पहचान कर कठोर दंड दिया जाए। प्राचार्य और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से सख्त जवाब तलब हो। आबकारी और पुलिस विभाग की मिलीभगत या लापरवाही की भी जांच हो। अन्यथा यह घटना भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चली जाएगी और शिक्षा के मंदिरों पर नशे का साया मंडराता रहेगा।

