संत कबीर ने समाज को आडंबरों के खिलाफ जगाया : रत्नावली कौशल........
CG. Right times news........
*मुंगेली।* संत कबीर ने आडंबरों, भेदभाव, छुआछूत के खिलाफ समाज को जगाने का अनुकरणीय काम किया है। उनके अमूल्य संदेश आज के परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह प्रासंगिक हैं। हम उनके उपदेशों को आत्मसात कर समाज का नव निर्माण कर सकते हैं।
उक्त उदगार छत्तीसगढ़ शासन के अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण सदस्य एवं महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव रत्नावली कौशल ने संत कबीर दास जी की जयंती पर सरदार वल्लभ भाई पटेल सभागृह में आयोजित कबीर भजन गायन कार्यक्रम में व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन मुंगेली के संयोजन में किया गया था। कौशल इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप में आमंत्रित थीं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डीएस राजपूत, जनपद उपाध्यक्ष पवन पाण्डेय, यहां गणमान्य नागरिक डॉ. लेखराम साहू, सुमन दास मानिकपुरी, जांतराम साहू, हेमंत मानिकपुरी, माधव साहू एवं राजेंद्र साहू विशिष्ट अतिथि थे। आरंभ में रत्नावली कौशल और अन्य अतिथियों ने संत कबीर दास साहेब के तैलचित्र पर श्रद्धा के फूल चढ़ाए और चौका आरती में भाग लिया। हिन्द सेना महिला ब्रिगेड राष्ट्रीय अध्यक्ष रत्नावली कौशल ने संत कबीर के दोहों और साखियों का उद्धरण प्रस्तुत करते हुए सारगर्भित विचार रखते हुए कहा कि संत कबीर जाति - धर्म, भेदभाव, आडंबरों और छल कपट से मुक्त समाज के पक्षधर थे। उनके दोहों और साखियों में इस बात के पुष्ट प्रमाण मिलते हैं। जीवन की वास्तविकता उनके दोहों में नजर आती है। कौशल ने कहा कि मूर्ति पूजा, कर्मकांड जैसे आडंबरों के खिलाफ संत कबीर दास साहेब ने समाज को जगाने का काम किया। छत्तीसगढ़ में कबीरपंथ के अनुयायियों की तादाद बहुत ज्यादा है। राज्य के दामाखेड़ा, धमतरी जिले के अरकार, राजनांदगांव जिले के नादिया राजा खुज्जी में अति प्राचीन कबीर मठ हैं। इन तीनों गुरु गद्दीयों से संत कबीर के उपदेशों और अमृतमयी वाणी का प्रचार प्रसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने शाकाहार, जीव दया, सत्य, अहिंसा की राह मानव समाज को दिखाई है। हम उनके बताए रास्ते पर चलकर आत्म कल्याण कर सकते हैं। कौशल जीव दया का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कबीर जी के अनुयायी जब भोजन पकाने के लिए जलावन के रूप में इस्तेमाल की जानी वाली लकड़ियों पर पहले पानी के छींटे मारते हैं, उसके बाद ही उन लकड़ियों को चूल्हे में डालते हैं। पानी के छींटे पड़ने से लकड़ियों में छुपे सूक्ष्म जीव बाहर निकल आते हैं और लकड़ी के साथ जलने से बच जाते हैं। रत्नावली ने कहा की जिस संत के अनुयायी छोटे से छोटे जीव की प्राण रक्षा के लिए सजग रहते हैं, उस महान संत सद्गुरु कबीर दास साहेब की वाणी कितनी अमृततुल्य है, आप कल्पना कर सकते हैं।
*कबीर से अभिप्रेरित हैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल*
वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री रत्नावली कौशल ने कि हमारे राज्य की कांग्रेस सरकार और संवेदनशील सहृदय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संत कबीर दास जी की जीवनचर्या, उनके संदेश उपदेशों से अभिप्रेरित होकर जन कल्याण की दिशा में सतत कार्य कर रहे हैं। संत कबीर, गुरु घासीदास बाबा, डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और अन्य महापुरुषों की राह के पथगामी बनकर मुख्यमंत्री श्री बघेल समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। संत कबीर दास साहेब के संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिए हमारी सरकार कबीर जयंती पर भजन गायन जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है। हमारी सरकार की सोच है कि संत कबीर, गुरु घासीदास बाबा, गुरु रविदास, डॉ. अंबेडकर के आदर्शो पर चलकर ही समाज का नव निर्माण किया जा सकता है और बेहतर ढंग से जन कल्याण के कार्य किए जा सकते हैं।

