सीजी राइट टाइम्स न्यूज चैनल की खास रिपोर्ट
काठमांडू- तिब्बत की पहाड़ियों में ग्लेशियर फटने से नेपाल के हिमालयी जिलों में भारी तबाही हुई है। भोटेकोशी नदी में आज सुबह 9:15 बजे आई अचानक बाढ़ ने रसुवा जिले के तिमुरे और स्याब्रुबेसी कस्बों को लगभग पूरी तरह बहा दिया। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सशस्त्र पुलिस के 33 जवानों सहित दर्जनों लोग लापता हैं।
अधिकारियों के मुताबिक यह एक क्लासिक GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) की घटना है। नेपाल पुलिस ने बताया कि तिब्बत में जमा ग्लेशियर झील अचानक फटने से यह सैलाब आया। लोकल लोगों ने बताया - "पहले ज्वालामुखी फटने जैसी आवाज आई, फिर पानी की दीवार दौड़ती हुई आई।"
*60 किमी तक बर्बादी के निशान*
यह सैलाब तिब्बत के शिलोंग से शुरू होकर नेपाल में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग होते हुए त्रिशूली नदी में मिला। 260 साल पुराने तिब्बत-नेपाल व्यापार मार्ग पर बने आधा दर्जन से ज्यादा पुल बह गए हैं। तिमुरे का कस्टम ऑफिस, त्रिभुवन त्रिशूला स्कूल और सैकड़ों गाड़ियां मलबे में दबी हैं।
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 430 मेगावाट की बिजली परियोजनाएं ठप हो गई हैं, जो देश की कुल हाइड्रो क्षमता का 12% से अधिक है।
सीमा के दूसरी ओर चीन के Gyirong पोर्ट पर भी भारी भूस्खलन हुआ है। चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने तिब्बत के Gyirong काउंटी में "मेजर कैजुअल्टी" की बात कही है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूरी ताकत से सर्च ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया है।
*रेस्क्यू में दिक्कत*
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है। नेपाल सेना रेस्क्यू ऑपरेशन लीड कर रही है, लेकिन नदी का जलस्तर इतना ज्यादा है कि हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर पा रहे।
आपदा प्रबंधन विभाग ने चितवन और पोखरा जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए हैं और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंची जगहों पर जाने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल भी इसी भोटेकोशी नदी में तिब्बत की सुपर-ग्लेशियल झील फटने से 9 लोगों की मौत हुई थी, और ग्लोबल वार्मिंग से ऐसी घटनाएं अब हर साल बढ़ रही हैं।
